शायरी
- अब किसी से मिलना,
बातें करना अच्छा नहीं लगता,
हर दफ़ा दिल का हाल
सुनाना अच्छा नहीं लगता।
यूँ तो बहुत-सी भीड़ लगी है
इस ज़माने में,
मगर आजकल
कोई भी चेहरा
सच्चा नहीं लगता…
2. तुझसे मिला तो ऐसा लगा,
जैसे जन्नत की सैर हो गई…
बरसों बाद देखी हैं ये मुस्कुराहटें,
लगता है मेरी दुआ
अब क़बूल हो गई…
.
4. मत पूछ कि प्यार की ख़ातिर
क्या किया है मैंने,
तुझे पाने के लिए
ख़ुद को ही खो दिया है मैंने…
तेरे सपनों को हक़ीक़त में
बदलते–बदलते,
मेरे ख़्वाबों को
अपने ही हाथों से
दफ़ना दिया है मैंने…
5. आज भी हर दुआ में
तू याद होता है,
तू साथ नहीं,
मगर दिल के पास होता है…
क़िस्मत में इश्क़ मुकम्मल नहीं हमारा,
फिर भी हर ख़्वाब में
तू शामिल होता है…
6. मेरी हर एक आरज़ू से
वाक़िफ़ है तू,
न जाने फिर भी
क्यों ख़ामोश है तू…
इस तरह अजनबी में
शामिल न हो,
मेरे सपनों का
अहम किरदार है तू…
7. दिल लगाने की ग़लती
मत करना मेरे दोस्त,
यहाँ दिल को देखने वाला
कोई नहीं होता…
ये जो हर दफ़ा
ख़्वाबों को सजा रहे हो,
संभल कर रहना —
अक्सर हक़ीक़त में
कुछ भी वैसा नहीं होता…
